भारत के पहले मुस्लिम प्रधानमंत्री

>> Sunday, 26 August, 2007

पंजाब से उदित होकर आज आतंकवाद पूरे देश में फैल चुका है। परन्तु स्थानीय लोगों की शय के बिना आतंकवाद फैल ही नहीं सकता। वैसे भी जीने के हालात तो समाप्त हो ही रहे हैं। एसे में आंतकवादी यदि पल भर में मौत देते हैं तो बहुत अच्छा है ना।
मंहगाई, गरीबी, भ्रष्टाचार एवं अपराधों की बढौतरी वैसे ही आम आदमी का गला घोंट रही है। लेकिन दिक्कत यह है कि यह सब चीजें जनता को तरसा तरसा के अधमरा कर देती हैं, उन्हे जबरदस्त तकलीफ देती है परन्तु प्राण नहीं लेती। परन्तु आतंकवादी तो सिर्फ जान लेते हैं वो भी पल भर में। वैसे भी बढती हुई जनसंख्या को कम करने का सबसे कारगर तरीका है आतंकवाद। रही सरकार की बात वो तो सो ही रही है हमेशा की तरह। विश्वास नहीं तो दिल्ली घूम आऒजी चैंकिगं हो जाए तो कहना।
एक और बात जी, हमारे ज्यादातर मंत्री, विधायक, सासंद आदि तो अपराधी हैं ही। पर मजा नहीं आता जी। कम से कम संसद का तो ख्याल होना चाहिए जी। मैं तो कहता हूं जितने भी आंतकवादी पकडें जाएं सबको सासंद बना दो। हाँ, एक प्रस्ताव अलकायदा के पास भेज दो कि २००९ में इलैक्शन हैं। लादेन ठीक रहेंगें ना प्रधानमंत्री। अरे भारत के पहले मुस्लिम प्रधानमंत्री।

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दिबांग युग समाप्त......NDTV अधर में

>> Saturday, 4 August, 2007


बडी ही चौंकाने वाली खबर थी कि दिबांगजी कॊ एनडीटीवी ने पदमुक्त कर दिया। वे एनडीटीवी के हिन्दी चैनल के प्रबंध संपादक थे। विभिन्न सूत्रॊं से मिली खबरॊं के अनुसार उन्हे हटाकर चैनल ने यह कार्यभार संजय अहिरवाल एवं मनीष कुमार कॊ सौंपा है साथ ही मनॊरजंन भारती कॊ राजनीतिक संपादक बना दिया गया है। इस भारी भरकम बदलाब ने मीडिया में फिर अस्थिरता ला दी है।

अरूणाचल प्रदेश के दिबांग मीडिया की लॊकप्रिय हस्ती हैं। उनके द्वारा एंकर किया जाने वाले कार्यक्रम खबरॊं की खबर और मुकाबला बहुत ही मशहूर एवं पुरस्कृत कार्यक्रम रहे हैं। उन्हे इस तरह से हटाने से मीडिया प्रेमियॊं कॊ करारा झटका लगा है। परन्तु मीडिया का एक बडा बर्ग इस फैसले से खुश भी है क्यॊंकि वे सख्त छवि वाले हैं एवं काम में कॊताही उन्हे गुस्सा दिलाती है।

वैसे उन्हे हटाने से जॊ नुकसान चैनल कॊ हॊगा उसकी भरपाई करना कठिन है क्यॊंकि संजय अहिरवाल की दर्शकॊं में पकड नहीं है। जब राजदीप सरदेसाई ने एनडीटीवी छॊडा था उसके बाद उन्हे टक्कर की एंकरिगं का मौका मिला था परन्तु आज यह कार्यक्रम फ्लॉप है। उम्मीद है कि एनडीटीवी दिबांग जी के बिना भी निष्पक्ष पत्रकारिता करेगा।

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