Saturday, 11 August, 2007

हे नारद! अब जाग जाओ, वरना....

सबकी खबर रखने का दावा करने वाले एग्रीकेटर नारद स्वयं नींद में लिप्त है। बडे ही दुख के साथ कहना पढ रहा है कि नारद अपने कर्तव्यों यहां तक की अपने किए गए वादों कॊ निभाने में भारी लापरवाही कर रहा है। इसके बहुत से उदाहरण हैं एवं बहुत से ब्लॉगरों को नारद से गंभीर शिकायतें हैं। परन्तु स्वतः ही सब ठीक हो जाने की आशा के कारण वे चुप हैं। लेकिन मेरे सब्र का बाधं आज टूट ही गया।
नारद से कई शिकायतें हैं परन्तु उनमें से जॊ महत्वपूर्ण हैं उनका विवरण मैं दे रहा हूं। पहली शिकायत है कि मैने अपने इस चिट्ठे का पंजीकरण जुलाई के अंतिम सप्ताह में ही कर दिया था परन्तु वह अभी तक पंजीकृत नहीं हुआ है जबकि हाल ही में बने चिट्ठों का पंजीकरण नारद पर हो चुका है। उदाहरण के तौर पर कहानी कलश की शुरूआत ६ अगस्त को हुई थी परन्तु वह पंजीकृत हो चुका है।
नारद रेंटिगं की तो ओर भी दयनीय स्थिति है। इसमें लिखा गया है कि रेटिंग के अनुसार चिट्ठाकारों की लिस्ट (अभी बीटा स्टेज पर है) रेटिंग पिछले रविवार की स्थिति अनुसार होगी। परन्तु वह पिछला रविवार कोन सा था सौ तो ईश्वर ही जानें। इसका उदाहरण है कि .....श्री कृष्णम् समर्पयामी ब्लॉग पर ८ जुलाई के बाद कुछ नहीं लिखा गया है परन्तु उसका रैंक १ है।
लिस्ट लबीं है परन्तु नारद सो रहा है। ठीक है हम मानते हैं कि आप एग्रीकेटर होकर हमारी मदद कर रहे हैं परन्तु इसका तात्पर्य नहीं हैं कि आप हमें मानसिक क्षति पहुचाएं। यदि आप नहीं कर सकते तो वादा ही ना करिए। वरना.............. हम सिर्फ आपके मोहताज नहीं हैं। जाग जाईए।

4 comments:

मुकेश कुमार said...

मे भी आपके जेसे ही करनो का शिकार हु मेरा चित्था नारद पर पन्जिकरन किये हुआ बारह दिन हो गये पर मेरा नाम जरुर नारद भक्त (जिन्होने हाल ही में नारद का लिंक अपने ब्लॉग पर दिया है।) मे एक बार आया था .

Amit said...

जैसा कि बहुतया बार कहा जा चुका है, कुछ तकनीकी लोचों के चलते नारद रेटिंग सिस्टम बहुत समय से बंद पड़ा है, जिस समय चालू हुआ था उसी समय के कुछ दिनों बाद से बंद है। मेरे अनुसार तो यह पन्ना होना ही नहीं चाहिए जब रेटिंग कार्य नहीं कर रही तो। मैं आपकी पंजीकरण की समस्या को जीतू भाई के समक्ष रखे देता हूँ और इस बारे में भी प्रयास रहेगा कि इस रेटिंग वाले पन्ने पर घोषणा लगा दी जाए कि यह फिलहाल कार्य नहीं कर रहा है।

बाकी आपसे अनुरोध है कि जो बात शांति से कही जा सकती है उसे धमकी भरे अंदाज़ में देने की कोई आवश्यकता नहीं है!! जब आप नारद के मोहताज नहीं हैं तो फिर धमका क्यों रहे हैं नारद को, बिलबिला क्यों रहे हैं? विकल्पों आदि की धमकी न दीजिए, विकल्पों के आने के बाद नारद बंद नहीं हो गया है!! अपनी बात शांति के साथ कहिए, खामखा चौड़े होने का क्या लाभ? आशा है कि आप मेरी बात को समझने का प्रयत्न करेंगे और थोड़ी शांति रखेंगे।

masijeevi said...

@ अमित, तकनीकी लोचे अपनी जगह हैं और ग्राहक की भाषा का 'चौड़ापन' अपनी जगह लेकिन उसके बाबजूद दुकानदार के चौड़ेपन पर भी विचार करें- पहले ही आप और जीतू की ऐंठ ने हिंदी अंतर्जाल से उसकी ऐ जीवंत चौपाल लगभग छीन ही ली है।
ये आपकी ही पोस्‍ट का लिंक है केवल एक बार पढें और देखें कि कहीं आप अपने ही कहे का विरोध तो नहीं कर रहे हैं- सुनील नारद तक कंटेंट ला रहे हैं यानि ग्राहक हैं- बाकी आपकी दुकान है उसे उजाड़ने से हम आपको कैसे रोक सकते हैं-

http://itsme.wordpress.com/2007/07/03/going-down/

Jitendra Chaudhary said...

एक एक करके जवाब:

@जालिम:
आपका कहानी कलश नामक ब्लॉग तो रजिस्टर हो चुका है, इस बाबत आपको इमेल भी की गयी थी, यदि आप अपनी इमेल चैक नही करते तो इसमे हमारा क्या दोष। आपके ब्लॉग पर आखिरी पोस्ट ११ अगस्त की थी, ये रही आपकी पोस्ट नारद पर:http://narad.akshargram.com/?s=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BE

रही बात रैंकिंग की, रैंकिग सिस्टम सभी साथियों की सर्वानुमति से डिसेबल किया गया था, इस बारे मे यदि आपको जानकारी ना हो, तो परिचर्चा पर पढ लें, बिला वजह अपना और दूसरों का समय बरबाद मत करिए।

@मुकेश
क्या आप बताएंगे कि आपने अपना ब्लॉग कैसे रजिस्टर किया था, हमे आपकी कोई इमेल नही मिली। सिर्फ़ अपने ब्लॉग पर नारद का लिंक देने से आपका ब्लॉग रजिस्टर नही होता। रजिस्टर करने के लिए मैने आपके ब्लॉग पर टिप्पणी डाली थी। ब्लॉग रजिस्टर करने के लिए इस लिंक पर जाइए:http://narad.akshargram.com/register/

@मसिजीवी
आपके बारे मे कुछ कहने को बचा ही नही, आपने आकर हिन्दी चिट्ठाजगत मे जो द्वेष/नफ़रत को फैलाया है वो सर्वविदित है, मै आपके तमाशे चुपचाप देख रहा हूँ, लेकिन शायद अब पानी सर से ऊपर हो रहा है।

किसी भी साथी को यदि शिकायत है तो sunonarad@gmail.com पर शिकायत करें, इस तरह से पोस्ट लिखकर लोगो का ध्यान आकर्षित मत करें, काठ की हांडी बार बार नही चढती।