
मानवीय इतिहास में यह अनोखी बात है कि एक अकेला व्यक्ति एक ही समय योद्धा, मसीहा और संत तीनों था और उससे भी अधिक वह विनम्र और मानवीय था - ये वे गुण हैं जो उनके चरित्र में प्रमुखता से दिखाई पड़ते हैं। हमें महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर अवश्य चलना चाहिए। वे एक विशेष मिशन के साथ दिल्ली आए थे। करो या मरो। उन्होंने काफी काम किया और अपना जीवन अपने मिशन को पूरा करने में समर्पित कर दिया। आइए, अब हम उनके अधूरे काम को पूरा करने में लग जाए!।
वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड पराई जाणे रे।
पर दुःखे उपकार करे तोये मन अभिमान ना आणे रे।
सकल लोकमां सहुने वदें निन्दा न करि केनी रे।
वाच काछ मन निश्चल राखे धन धन जननी तेनी रे।
समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी पर स्तरी जान मात रे।
जिव्हा थकी असत्य न बोले परधन नव झाले हाथ रे।
मोहमाया व्यापे नहि जेने दृढ़ वैराग्य जेना मनमां रे।
रामनामशुं ताली लागी सकल तीरथ तनमां रे।
वणलोभी कपट रहितछे कामक्रोघनिवार्या रे।
हे राम!
Monday, 1 October, 2007
बापू गाधीं की जय ...विश्व अहिसां दिवस की बधाई
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बापू गाँधी,
महानता
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1 comments:
बापू को हमारा भी नमन.
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