वे जमाने गए जब महिलाऒं को अग्निपरीक्षा देनी पडती थी। वरना इतिहास साक्षी है सीता से लेकर आम ऒरत तक सभी को स्वयं को निर्दॊष साबित करने के लिए तरह तरह की परीक्षांए देनी पडी थी परन्तु आज के तथाकथित पुरूषप्रधान समाज में तो पुरूषों को ही अग्निपरीक्षा देनी होती है। राजस्थान के अजमेर जिले के बोराज नामक गांव में एक महिला के साथ ब्लातकार करने के दोषी को पहचानने के लिए पंचायत ने अनोखा फैसला सुनाया। पंचायत ने अपने फैसले में कहा कि गांव के हर व्यक्ति को कपडे उतरवाकर अपने शरीर की जांच करवानी होगी ताकि इस बात की जांच हो सके कि उनके शरीर पर कोई चोट या खरोंच का ताजा निशान तो नहीं। क्योंकि ऎसा करने से बलातकारी की पहचान आसानी से हो सकती है। अतः सौ से भी अधिक लोंगों को पंचायत के सामने नंगा घूम कर अपनी नेकनियति का प्रमाण देना पडा। लेकिन दुर्भाग्य कि इतने के बाबजूद भी बलात्कारी की पहचान नहीं हो सकी।
Sunday, 7 October, 2007
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1 comments:
सुनील जी,
ये बात सही है कि ऐसा हुआ पर ये बात सही है कि इस तरफ के आश्चर्य जनक निर्णयों से ही कुछ हद तक लोगों को अच्छा सकेंत दिया जा सकता। कि अब गुनहगारों का बचना आसान न होगा। कुछ हद तक ये फैसले कारगर हो सकते है आप कुछ और ही सशक्त लिखने की कोशिश करें।
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