स्त्री और पुरुष बराबर नही हो सकते.......

>> Friday 7 March 2008

लड़का-लड़की एक समान यह बात हमारी किताबों में बहुत लिखी रहती है..लेकिन आज के दौर में अन्याय बन चुकी है. आज महिला दिवस पर मैंने सोचा की बात कह ही दी जाए जिसको मन में में दबाये रखा था मैंने काफी वक्त से.

हर बार महिलाओं को आगे बदने की बात होती है लेकिन दुर्भाग्य यही की सिर्फ बात होती है.... ऐसा नही है की तरक्की नही हुई है...बेशक हुई है लेकिन परेशानी बरकरार है...आज के २१वीं सदी में जब हम बातें करतें हैं बड़ी बड़ी लेकिन हकीकत कुछ और ही है..... आज भी हरियाणा जैसे तथाकथित उन्नत राज्यों में भ्रूण हत्या होती है....पंजाब में बुरी हालत होती है... लेकिन कानून ....एक किस्सा है... मैं हिमाचल से हूँ ...वहाँ के कुल १२ में से ६ जिले ऐसे हैं जहाँ लड़कियों की संख्या लड़कों से ज्यादा है...सरकार ने वहाँ कानून बनाया है की कन्या भ्रूण हत्या 'हत्या' के बराबर का अपराध है... लेकिन दूसरा पहलु भी है...आज के दौर में भी अगर लोगों की मानसिकता तुछ है तो फिर यह शर्म की बात है....और यह लोग और कोई नही हम ही हैं....

लेकिन फालतू का शोर भी अच्छा नही होता...महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले चोर समाजसेवक भूल जातें है इसका दोष किसी और पर थोपना ठीक नही है......आज दैनिक हिंदुस्तान में एक शीर्षक दिया गया है इसी मुद्दे पर जो अमरीका चुनाव और हिलेरी से जुड़ा है... लेकिन मैं यह भी कहना चाहता हूँ की हम केवल इस आधार पर किसी को 'नेता' नही बना सकते की वो महिला है...

हो सकता की आपका मानसिकता अलग हो लेकिन सच्चाई तो यही है... हाँ आप यह जरूर कह सकते है की जब हमने अपराधियों को नेता बना दिया तो महिला को भी बन सकते हैं...ख्याल तो इस बात का भी रखना चाहिए कि जैसे हम आज महिलाओं का पक्ष लेते हैं कल को मामला पलट न जाए..
वैसे जैसा मैंने शीर्षक दिया है महिला और पुरुष बराबर नही हो सकते...खासकर हमारी संस्कृति के अनुसार...जहाँ महिला पूज्य है...पुरुष से कहीं ऊपर है.

पता नही कैसे महिला की अबला कह दिया गया...

5 comments:

दिनेशराय द्विवेदी 7 March 2008 at 11:10 PM  

सुन्दर आलेख, उत्तम भावनाऐं। हमें तो ये अलग अलग तरह की समानताऐं ही अच्छी नहीं लगती हैं। इन्सान-इन्सान बराबरा क्यों नहीं।

anitakumar 8 March 2008 at 12:56 AM  

ऐसे राज्य से ताल्लुक रखते हो जहां भ्रूण हत्या आम बात है और फ़िर भी ऐसे विचार रखते हो, जीते रहो।

राज भाटिय़ा 8 March 2008 at 8:36 AM  

सुनील बहुत अच्छा लिखा, आज नारी दिवस पर सभी नारिया न सही आधी नारिया भी भ्रूण हत्या के बिरोध मे आवाज उठाये तो भ्रूण हत्या दो दिन मे बन्द हो सकती हे,जिस नारी के साथ भ्रूण हत्या का केस होता हे वो चुप क्यो बेठती हे,पुलिस मे केस करे फ़िर देखो केसे होती हे भ्रूण हत्या , लेकिन नही कयो की नारी ही तो .....
आप सब को नार्री दिवस की बधाई

SUNIL DOGRA जालि‍म 9 March 2008 at 10:55 AM  

दिवेदी जी धन्यवाद ... राज जी आप ने सदा ही मेरा उत्साह बढाया है....
हाँ...अनिता जी जरूर कुछ ग़लतफ़हमी हो गयी है..हिमाचल में तो भ्रूणहत्या न के बराबर होती है....

munish 20 March 2008 at 7:57 AM  

yaar gahri chot khaye ho kisi mahila se?

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