तिब्बत की बातें अच्छी नहीं लगती

>> Tuesday 18 March 2008

एक बार की बात है. तिब्बत नाम का कोई देश हुआ करता था. फिर एक बार चीन ने तिब्बत पर कब्ज़ा कर लिया...और वहां के धर्मगुरु दलाईलामा को निवासित करके देश से निकाल दिया... और फिर हमेशा की तरह बडे दिल वाले भारत ने उन्हें शरण दी..

लेकिन जैसा की कहा जाता है ना सोने के पिंजरे में बंद पक्षी से जंगल में मोजूद पक्षी कहीं खुश होता है... कहने का मतलब है किया आज़ादी सबको प्यारी होती है..

बात यह है की भारत में लोकतंत्र है चीन में नहीं..वहाँ गणतंत्र है..कोई अबज़ उठता है तो उसकी आवाज़ तोपों की अबाज़ के आगे खामोश हो जाती है...या खामोश कर दी जाती है..

मैं मूलतः हिमाचल प्रदेश का रहने वाला हूँ..धर्मशाला ज्यादा दूर नहीं है मेरे घर से..वहीं पर तिब्बत सरकार और तिब्बती लोगों का बसेरा है..मुद्दे बहुत हैं...सोचा जाए तो लामा लोगों को तो बिहार में रहना चाहिए क्योंकि बुध भगवान वहीं के थे... परन्तु वे तो हिमाचल में रहते हैं..साथ ही वहां कोई उन्हें पराया भी नहीं कहता जबकि मुम्बई में तो 'लोग' अपने ही देशवासीयों को नहीं बख्शते हैं...खैर छोडिये...बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी...

अभी कुछ दिन पहले चीन ने तिब्बत में सैंकडों लोगों को मार डाला हालाकि रिपोर्ट में कहा गया की मात्र १० लोग ही मारे गए हैं...आज़ादी का आन्दोलन तेज हो चुका है ..लेकिन तय है की उसे दबा दिया जाएगा...
मैं आपसे पूछता हूँ की क्या आप समर्थन करते हैं इस आन्दोलन का... जबाब देने से पहले याद रखियेगा की भारत में भी कई जगह आज़ादी के आन्दोलन चल रहे हैं..फिर पैमाना तो एक ही होता है ना..

4 comments:

इष्ट देव सांकृत्यायन 18 March 2008 at 11:59 PM  

जालिम साहब
राजकुमार सिद्धार्थ यानी भगवान बुद्ध का जन्म जहाँ हुआ था वह लुम्बिनी कानन अब नेपाल में है. जहाँ उनका महापरिनिर्वान हुआ वह जगह कुशीनगर और जिस गणराज्य के अधिपति उनके पिता शुद्धोदन थे वह कपिलवस्तु अब उत्तर प्रदेश में है.

परमजीत बाली 19 March 2008 at 4:02 AM  

आप की बात सही है।....

munish 20 March 2008 at 7:54 AM  

par apki soch sahi hai.

दीपक भारतदीप 23 March 2008 at 1:10 AM  

बहुत बढिया जानकारी आपने दी है. आप बहुत बढिया लिखते हैं और इस क्रम को रोकिये नहीं. होली के अवसर पर आपको मेरी शुभकामनाएं.
दीपक भारतदीप

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