लोकतंत्र की कसौटी पर खरा नहीं उतरता डा.कलाम का प्रस्ताव

>> Tuesday 1 April 2008

जनता के राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने कुछ दिन पूर्व एक प्रस्ताव रखा. चूँकि कलाम साहब की सबकी नज़रों में बहुत इज्ज़त है इसलिए सब ने उस प्रस्ताव पर बड़ी गौर से विचार किया. चर्चा पर आगे बढने से पहले जरा एक नज़र प्रस्ताव पर मार लें...

सांसदों का कार्यकाल एक बर्ष बडा दिया जाये तथा बडे हुए बर्ष में उन्हें व्हार्टन या हार्वर्ड में मनैज्मेंट का प्रशिक्षण लेने के लिए भेजा जाये.. ताकि संसद पार्टी के प्रति मोह छोड़ सकें

पहली बात एक कम्पनी को मनेज्मेंट से चाल्या जा सकता है..किसी राष्ट्र को नहीं.. और फिर हमारे देश में तो कामराज और बसंत साठे जैसे नेता हुए है जो अनपढ़ थे परन्तु विश्व के महान प्रशासक साबित हुए हैं.. अकबर और अशोक जैसे सम्राट कभी हारवर्ड नहीं गए..
इतना ही नहीं हमारे देश के नेता हार्वर्ड में जरूर पडा चुके हैं जिनमे लालू यादव भी शामिल हैं..लेकिन तर्क यह नहीं हैं..
तर्क लोकतंत्र से जुडे हैं. भराटी उन चुनदा देशों से है जहाँ समाज के हर तबके को एक साथ वोट देने का अधिकार मिला..जबकि अधिकतर पश्चमी देशों में वोट का अधिकार पाने के लिए क्रांतियाँ हुई..ताकि सीमित लोकतंत्र को ख़त्म किया जा सके.. वैसे भी लोकतंत्र का मतलब होता की लोगों का तंत्र.. संसद अमीन समाज का आइना होना चाहिए ना की चटर-पटर अंग्रेजी बोलने वाले विदेशी दिमाग.. हमे ऐसे लोग चाहिए जो समाज को समझ सकें क्योंकी भारत में ७० प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो दिन में यह समझ पाने में असमर्थ होते हैं की रात को रोटी नसीब होगी की नहीं..

सलाह देना और उसका पालन करना अलग अलग चीजे हैं.. वैसे भी संसद बदलते रहते हैं कितने लोगों को हार्वर्ड भेज कर पैसे फूंकेंगे.. वह लोग वहाँ से भोले-भले लोगों को मूर्ख बनाने के नये गुर ही सीख के आयेंगे... जहाँ तक पार्टी के मोह की बात है तो पार्टी को विचारधारा का प्रतीक माना जाता है

सबसे अच्छा उपाए है की भारत की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त बनया जाये और सबको शिक्षा मिले..

इस प्रस्ताव का कई बुद्धिजीवी लोगों ने विरोध किया है जिन में पत्रकार नीरजा चौधरी भी शामिल हैं..

3 comments:

अविनाश वाचस्पति 1 April 2008 at 6:47 AM  

http://nukkadh.blogspot.com/
http://jhhakajhhaktimes.blogspot.com/
http://bageechee.blogspot.com/
http://avinashvachaspati.blogspot.com/

आपके लिए उपयोगी लिंक्‍स, महत्‍वपूर्ण सूचनाएं.

राज भाटिय़ा 1 April 2008 at 10:46 AM  

सबसे अच्छा उपाए है की भारत की शिक्षा प्रणाली को दुरुस्त बनया जाये और सबको शिक्षा मिले
बहुत सही हे आप के विचार,धन्यवाद

munish 10 April 2008 at 10:59 AM  

ye log unko bhi bigaad ayenge kalaam saab!

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