हमलावर खबरदार! जम्मू भी है तैयार

>> Monday 4 August 2008

अक्टूबर १९४७ में जब पाकिस्तानियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया. उस समय तक कश्मीर एक अलग देश हुआ करता था. महाराजा हरि सिंह डोगरा के आग्रह पर भारत सरकार ने हमलावरों को रोकने के लिए सेना भेज दी. उस समय कश्मीर जाने वाले सेना के एक बडे अफसर बताते हैं की कश्मीर में हर जगह पोस्टर लगे हुए थे जिन पर लिखा था...



हमलावर खबरदार
कश्मीरी हिन्दू, सिख मुस्लिम हैं तैयार

अब आज इतने साल बाद कश्मीर में अगर जम्मू से भी कोई चला जाये तो उसका बापस आना तय नहीं होता. जवाहर सुरंग जम्मू और कश्मीर को अलग करती है, हिन्दू मुसलमानों को अलग करती है. इतना अलग की फिर वो कभी नहीं मिल पाते.. शायद मरने या शहीद होने के बाद भी नहीं.
राज्य सरकार ने अमरनाथ यात्रा के लिए कुछ जमीन दे दी ताकि यात्रियों को कुछ सुविधाएँ दी जा सकें. पर कश्मीर जल उठा. साथ में जन्नत कही जाने वाली घटी में तिरंगे जल उठे. भारत भूमि पर पाकिस्तानी झंडे लहराए गये. पाकिस्तान के लिए और कश्मीर की आजादी के नारे लगाये गये. आखिर सरकार ने जमीन बापस ले ली. हाँ इसी बीच राज्य सरकार की भी बली दे दी गयी. शायद अल्लाह को या फिर बाबा अमरनाथ को.

लेकिन फिर जम्मू जल उठा. अब तिरंगे लहराने लगे. बाबा अमरनाथ के नारे गूंजने लगे. हाँ, धरती जम्मू की भी लाल हुई ठीक वैसे ही जैसे कश्मीर की लाल हुई थी. खून का मजहब नहीं होता. पर शयद जमीन का होता है. कौन सा? यह मिझे नहीं पता. अगर पता होता तो हिन्दू जमीन हिन्दुओं को दे दी जाती और मुस्लिम जमीन मुसलमानों को... पर अफ़सोस.
खैर, कश्मीरी नेता उमर अब्दुल्ला ने संसद में कहा 'यह हमारी जमीन की लड़ाई और हम लडेंगे. उन्होंने यह भी कहा की वो भारतीय हैं और मुस्लिम हैं' उनकी कुछ बातें गले उतरी और कुछ पर कूटनीतिक सवाल उठ गये..
कुछ भी हो जम्मू के अंदर इतना लावा हो सकता है शायद की किसी ने सोचा था. क्योंकि जम्मू शांत शहर है. और फिर लावा एक दिन में नहीं बनता ..अब तक जम्मू की जो अनदेखी हुई है वो सब लावा बनकर फ़ुट पड़ा है. वैसे भी जब एक शांत शहर अपनी शराफत छोड़ देता है तो ससे खतरनाक कोई नहीं होता..

मुझे नहीं पता गलती किसकी है लेकिन जो हो रहा है ठीक नहीं है. काश भोले बाबा या कोई अल्लाह इन चीखों को सुन कर कुछ करिश्मा कर दे. लेकिन हमने तो यहाँ तक सुना है की ईश्वर भी नहीं होता..

3 comments:

राज भाटिय़ा 5 August 2008 at 11:12 AM  

अल्लाह ओर ईश्बर ने दिमाग दिया हे इन्सान को, जब जानवर के घर पर कोई हमला करता हे तो जानवर अल्लाह ओर ईश्बर को नही बुलाता अपने घर की खुद रक्षा करता हे,थोडे दिनो पहले देखा था एक भेसों का झुण्ड केसे शॆरो पर हमला करता हे, अपनी सुरक्षा के लिये, जब झुण्ड का लिडर ही कमजोर हो तो झुडं क्या करे??
आप का लेख अच्छा हे,धन्यवाद

परमजीत बाली 5 August 2008 at 11:21 AM  

राज जी से पूरी तरह सहमत हूँ...सच तो यही है..

राज भाटिय़ा 14 August 2008 at 3:04 PM  

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाऐं ओर बहुत बधाई आप सब को

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