जय हो रहमान (भारतीयों के दिमाग फीके पकवान)
>> Monday 23 February 2009
संगीत के महादिग्गज ए आर रहमान को और स्लमडॉग मिलेनीअर को ओस्कर अवार्ड मिलने की बहुत ख़ुशी है.. आपको भी बहुत बहुत बधाई.. हाँ स्माइल पिंकी के लिए भी मुबारक....लेकिन साथ में दुःख भी है की हम भारतीयों के दिमाग एक सोच से ऊपर उठ ही नहीं पाते.. अब ब्लॉग जगत को ही लीजिये.. जब से स्लमडॉग... चर्चा में आई है तब से ही इसकी आलोचना हो रही है.. कुछ ही समझदार लोगों ने समर्थन किया है..
अब सबसे बडा सवाल यह है की भारतीय फिल्मों को आस्कर क्यों नहीं मिलता.. अजी कैसे मिलेगा नक़ल माल को कुछ नहीं मिलता... वैसे भी हम लोगों को तारीफ़ करना कम आती है...
अब सबसे बडा सवाल यह है की भारतीय फिल्मों को आस्कर क्यों नहीं मिलता.. अजी कैसे मिलेगा नक़ल माल को कुछ नहीं मिलता... वैसे भी हम लोगों को तारीफ़ करना कम आती है...
संगीत के महादिग्गज ए आर रहमान को और स्लमडॉग मिलेनीअर को ओस्कर अवार्ड मिलने की बहुत ख़ुशी है.. आपको भी बहुत बहुत बधाई.. हाँ स्माइल पिंकी के लिए भी मुबारक....लेकिन साथ में दुःख भी है की हम भारतीयों के दिमाग एक सोच से ऊपर उठ ही नहीं पाते.. अब ब्लॉग जगत को ही लीजिये.. जब से स्लमडॉग... चर्चा में आई है तब से ही इसकी आलोचना हो रही है.. कुछ ही समझदार लोगों ने समर्थन किया है..
अब सबसे बडा सवाल यह है की भारतीय फिल्मों को आस्कर क्यों नहीं मिलता.. अजी कैसे मिलेगा नक़ल माल को कुछ नहीं मिलता... वैसे भी हम लोगों को तारीफ़ करना कम आती है...
अब सबसे बडा सवाल यह है की भारतीय फिल्मों को आस्कर क्यों नहीं मिलता.. अजी कैसे मिलेगा नक़ल माल को कुछ नहीं मिलता... वैसे भी हम लोगों को तारीफ़ करना कम आती है...



5 comments:
भाई मीठे पकवान, ये एक ही पैराग्राफ़ की माइक्रो पोस्ट दो-दो बार क्यों लिखी हुई है? और जिन "समझदार लोगों"(?) ने स्लमडॉग की तारीफ़ की है शायद उन्हें हिन्दुओं का बर्बर चित्रण भी पसन्द आया होगा…
वैसे भी हम लोगों को तारीफ़ करना कम आती है... sahi hai hamne bhi iski aalochnaa ki thi...guljaar ji ko badhi...lekin kyaa isse pahle aaskar laayak bhaartiy philmen nahi bani kyaa?aur ise aaskar milegaa ye bhi ham jaanten the...ye sab baajaar vaad kaaa ek paart hai..jo ho ismen kaam karne waalen sabhi hindustaaniyon ko shubhkaamnaa
लेकिन साथ में दुःख भी है की हम भारतीयों के दिमाग एक सोच से ऊपर उठ ही नहीं पाते.. अब ब्लॉग जगत को ही लीजिये.. जब से स्लमडॉग... चर्चा में आई है तब से ही इसकी आलोचना हो रही है
सुनील भाई , मेरी मां बहन को बेच कर मुझे कोई दुनिया के सब से बडे तख्त पर बिठा दे या मेरे ही घर की गरीबी का मजाक बना कर मेरे को दस बारह सोने के जुते मारे तो मै इसे किस्मत नही कहुंगा, ईनाम नही कहुंगा, बल्कि लानत कहूंगा ओर यह लानत मुझे नही पसंद, ओर यह आस्कार जो मिला है यह कोई इनाम नही , जिसे देख कर हम खुशी से झुमे.
यह समझ दार लोग तो गुलाबी चड्डियां भी बांटते है, ओर इन्ही समझ्दार लोगो की वजह से हम हर बार गुलामी की ओर बढे है... ओर अब बढ भी रहे है.
धन्यवाद
आस्कर की खुशी से खुश तो होना ही चाहिए...पर चिंता भी जायज है...महा शिव रात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं..
क्या करे ब्लोगजगत मे आप अकेले समझदार जो है :) कभी मुस्लिम बनने की सोचते है कभी स्लमडाग . आपको ही मुबारक हो झुग्गी का कुत्ता बनना हम तो बेवकूफ़ ही अच्छॆ
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